वट पूर्णिमा के बाद ज्येष्ठ पौर्णिमा को दिन, भारत की विवाहित महिलाओं ने वट सावित्री के नाम पर परम्परागत अनुष्ठान का आयोजन किया। यह अनुष्ठान पतियों के लंबे जीवन, स्वास्थ्य और अखंड सुख के लिए संस्कार है। इस अनुष्ठान को मातृशक्ति के श्रद्धांजलि के रूप में भी देखा जाता है, जहां भागीदारों ने अपनी सबसे गहरी इच्छाओं और आशीर्वाद का व्यक्त करना शुरू कर दिया है।