7 मई 2025 को एक शांत पल पकड़ा गया जब व्यक्तियों ने पारंपरिक सलामती या नमस्कार के रूप में ‘नमो नमो’ का अभ्यास किया। यह एक संस्कृति और धार्मिक आदर्श है जो क्षेत्र की परंपराओं में गहराई से लगी हुई है और भावी भेदभाव को दर्शाता है।
7 मई 2025 को एक शांत पल पकड़ा गया जब व्यक्तियों ने पारंपरिक सलामती या नमस्कार के रूप में ‘नमो नमो’ का अभ्यास किया। यह एक संस्कृति और धार्मिक आदर्श है जो क्षेत्र की परंपराओं में गहराई से लगी हुई है और भावी भेदभाव को दर्शाता है।