पहले कुछ दिनों, ‘भव्य सेवक संमेलन’ नामक महत्वपूर्ण समारोह आयोजित किया गया, जो मानवता के सभी व्यक्तियों के बीच एकता और समानता के महत्व को बल देता है। इस समारोह में यह विचार प्रस्तुत किया गया कि हर व्यक्ति एक अतीतर्क्षी शक्ति का अंश है और मानवीय मूल्य धार्मिक विभेदों से ऊपर हैं। इसके अलावा, एक निरंतर चैतन्यशील, निराकार शक्ति के बारे में भी चर्चा की गई।